महाराष्ट्र में लगा राष्ट्रपति शासन, माया मिली न राम जैसी शिवसेना की स्थिति

President's rule in Maharashtra: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंगलवार को महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की सिफारिश को मंजूरी देते हुए राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया है।

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President’s rule in Maharashtra: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंगलवार को महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की सिफारिश को मंजूरी देते हुए राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया है।

बता दें कि महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने मंगलवार को राजनीतिक पार्टियों को चौंकाते हुए, राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की अनुशंसा वाली एक रिपोर्ट राष्ट्रपति को भेजी थी। राजभवन की ओर से घोषणा के अनुसार, “महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी इस बात से संतुष्ट हैं कि चूंकि राज्य सरकार को संविधान के अनुसार नहीं चलाया जा सकता। उन्होंने इस बाबत संविधान के अनुच्छेद 356 के प्रावधानों पर विचार करने के बाद आज एक रिपोर्ट दाखिल की है।”

दरअसल, राज्यपाल का यह निर्णय ऐसे समय आया, जब राकांपा (एनसीपी) को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया गया था और मंगलवार रात 8.30 बजे तक इस बाबत रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा गया था।

राज्यपाल के फैसले के खिलाफ शिवसेना सुप्रीम कोर्ट पहुंची

शिवसेना ने महाराष्ट्र के राज्यपाल के फैसले के खिलाफ सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। शिवसेना ने सरकार बनाने के लिए राज्यपाल द्वारा राकांपा व कांग्रेस से समर्थन पत्र लेने के लिए समय नहीं दिए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। शीर्ष कोर्ट की रजिस्ट्री को इस पर अभी प्रधान न्यायाधीश से मंजूरी मिलनी बाकी है, जिससे मामले को सूचीबद्ध किया जा सके।

शिवसेना ने कहा कि राज्यपाल ने सरकार बनाने के लिए अतिरिक्त समय देने से इनकार कर दिया है।

कांग्रेस के शीर्ष नेता मुंबई में, शरद पवार से मुलाकात

महाराष्ट्र के राज्यपाल बी.एस. कोश्यारी द्वारा राज्य में सरकार बनाने के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) को आमंत्रित करने के एक दिन बाद कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मंगलवार को राकांपा प्रमुख शरद पवार से सरकार बनाने की योजना पर वार्ता की और पार्टी के तीन वरिष्ठ नेताओं को उनके साथ विचार-विमर्श करने के लिए मुंबई भेजा। कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने ट्वीट कर कहा, “कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आज सुबह शरद पवार से बात की और पवार के साथ आगे की चर्चा के लिए अहमद पटेल, मल्लिकार्जुन खड़गे और मुझे जिम्मेदारी सौंपी है।”
गौरतलब है कि सोमवार शाम सोनिया ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ दो महत्वपूर्ण बैठकें करने के बाद भी शिवसेना को सरकार बनाने के लिए महाराष्ट्र में कांग्रेस का समर्थन देने के संबंध में अपना रुख स्पषट नहीं किया है।

कांग्रेस ने शाम को एक बयान जारी कर कहा कि वह अपने गठबंधन सहयोगी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के साथ ‘आगे की चर्चा’ करेगी, जो राज्य में शिवसेना का समर्थन करने के लिए इच्छुक है।

इतना ही नहीं, सोमवार को शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे ने भी सोनिया से बात कर सरकार बनाने के लिए उनका समर्थन मांगा था। रविवार को राज्यपाल ने शिवसेना को राज्य में सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया, जब भाजपा ने कहा कि वह सरकार बनाने में असमर्थ है। राज्यपाल ने राज्य में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरे राकांपा को सोमवार शाम को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया।

चूँकि, राज्य में राष्ट्रपति शासन लगने के बाद शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस सरकार नहीं बना पाने का ठीकरा राज्यपाल पर फोड़ा जा रहा है कि बीजेपी को सरकार बनाने के लिए 48 घंटे दिया गया और हमें समय नहीं दिया गया है। असल में, तीनों दल जो सरकार बनाना चाहती हैं, उनकी सीटें लगभग एक सामान हैं , ऐसे में मुख्यमंत्री के तीन दावेदार होने की खबर है। इससे साफ़ है कि शिवसेना का आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाने का सपना टूटता नज़र अ रहा है। यह भी जानना जरुरी कि राकांपा और कांग्रेस ने एक साथ एक साथ मिलकर चुनाव लड़ा है , ऐसे में इनके विधायकों की संख्या शिवसेना से ज्यादा होती है और दोनों पार्टी बिलकुल नहीं चाहेंगी कि मुख्यमंत्री शिवसेना पार्टी का हो। अब तो यही कहेंगे कि माया मिली न राम…।