Makar Sankranti 2020: कब है मकर संक्रांति, क्या महत्व है, क्या करें ? जानें

एक खगोलीय घटना है, हर बार यह समय लगभग 20 मिनट बढ़ जाता है। 72 साल बाद एक दिन का अंतर पड़ जाता है। लगभग 150 साल के बाद 14 जनवरी की डेट आगे पीछे हो जाती है।

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मदन गुप्ता सपाटू,ज्योतिषाचार्य
Makar Sankranti 2020: नवग्रहों में सूर्य ही एकमात्र ग्रह है, जिसके आस पास सभी ग्रह घूमते हैं। यही प्रकाश देने वाला पुंज है, जो धरती के अलावा अन्य ग्रहों पर भी जीवन प्रदान करता है। प्रत्येक वर्ष 14 जनवरी को सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, जिसे सामान्य भाषा में मकर संक्रांति कहते हैं। यह पर्व दक्षिणायन के समाप्त होने और उत्तरायण प्रारंभ होने पर मनाया जाता है। वर्ष में 12 संक्रांतियां आती है। चूंकि, विशिष्ट कारणों से इसे ही सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना गया है।

यह एक खगोलीय घटना है जब सूर्य हर वर्ष धनु से मकर राशि में प्रवेश करता है और हर बार यह समय लगभग 20 मिनट बढ़ जाता है। लिहाजा 72 साल बाद एक दिन का अंतर पड़ जाता है। पंद्रहवीं शताब्दी के आसपास यह संक्राति 10 जनवरी के आसपास पड़ती थी और अब यह 14 व 15 जनवरी को होने लगा है। 2012 में सूर्य मकर राशि में 15 जनवरी को आया था।

लगभग 150 साल के बाद 14 जनवरी की डेट आगे पीछे हो जाती है। सन् 1863 में मकर संक्रांति 12 जनवरी को पड़ी थी। । गणना यह है कि 5000 साल बाद मकर संक्रांति फरवरी के अंतिम सप्ताह में मनानी पड़ेगी।

15 जनवरी को मकर संक्रांति
14 जनवरी 2020 मंगलवार, पंचमी तिथि, पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में रात्रि 2 बजकर 07 मिनट पर सूर्य, मकर राशि में आएंगे। इसका पुण्यकाल बुधवार, 15 जनवरी दोपहर तक रहेगाा।

मकर संक्रांति के अवसर पर गंगा स्नान एवं गंगातट पर दान को अत्यंत शुभ माना गया है। इस पर्व पर तीर्थराज प्रयाग एवं गंगासागर में स्नान को महास्नान की संज्ञा दी गयी है।

सामान्यत: सूर्य सभी राशियों को प्रभावित करते हैं, किंतु कर्क व मकर राशियों में सूर्य का प्रवेश धार्मिक दृष्टि से अत्यन्त फलदायक है। यह प्रवेश अथवा संक्रमण क्रिया 6.6 माह के अंतराल पर होती है।

भारत देश उत्तरी गोलार्ध में स्थित है। मकर संक्रांति से पहले सूर्य दक्षिणी गोलार्ध में होता है अर्थात् भारत से अपेक्षाकृत अधिक दूर होता है।

क्या करें मकर संक्रांति पर ?

इस दिन पवित्र नदियों एवं तीर्थों में स्नान, दान,देव कार्य एवं मंगलकार्य करने से विशेष लाभ होता है। महाभारत युद्ध में भीष्म पितामह ने भी प्राण त्यागने के लिए इस समय अर्थात सूर्य के उत्तरायण होने तक प्रतीक्षा की थी।

सूर्योदय के बाद खिचड़ी आदि बनाकर तिल के गुड़वाले लडडू प्रथम सूर्यनारायण को अर्पित करना चाहिए बाद में दानादि करना चाहिए। अपने नहाने के जल में तिल डालने चाहिए।

मंत्र: ओम नमो भगवते सूर्याय नम: या ओम सूर्याय नम: का जाप करें।

माघ माहात्म्य का पाठ भी कल्याणकारी है। सूर्य उपासना कल्याण कारी होती है। सूर्य ज्योतिष में हडिड्यों के कारक भी हैं अत: जिन्हें जोड़े के दर्द सताते हैं या बार बार दुर्घनाओं में फ्रैक्चर होते हैं उन्हें इस दिन सूर्य को जल अवश्य अर्पित करना चाहिए।

देव स्तुति, पित्तरों का स्मरण करके तिल, गुड़, गर्म वस्त्रों कंबल आदि का दान जनसाधारण, अक्षम या जरूरतमंदों या धर्मस्थान पर करें। माघ मास माहात्म्य सुनें या करें। इस दिन को धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस अवसर पर दिया गया दान सौ गुणा फल देता है।