Karva Chauth 2019: करवा चौथ व्रत पूजा कैसे करें और क्या है कहानी? जानें

कार्तिक कृष्ण पक्ष में करक चतुर्थी अर्थात करवा चौथ का लोकप्रिय व्रत सुहागिन और अविवाहित स्त्रियां पति की मंगल कामना एवं दीर्घायु के लिए निर्जल रखती हैं। इस दिन न केवल चंद्र देवता की पूजा होती है अपितु शिव-पार्वती और कार्तिकेय की भी पूजा की जाती है।

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Karva Chauth moon rise time, Karva Chauth auspicious time, Karva Chauth puja vidhi, Karva Chauth worship materials: कार्तिक कृष्ण पक्ष में करक चतुर्थी अर्थात करवा चौथ का लोकप्रिय व्रत सुहागिन और अविवाहित स्त्रियां पति की मंगल कामना एवं दीर्घायु के लिए निर्जल रखती हैं। इस दिन न केवल चंद्र देवता की पूजा होती है अपितु शिव-पार्वती और कार्तिकेय की भी पूजा की जाती है। इस दिनविवाहित महिलाओं और कुंवारी कन्याओं के लिए गौरी पूजन का भी विशेश महात्म्य है। आधुनिक युग में चांद से जुड़ा यह पौराणिक पर्व महिला दिवस से कम नहीं है जिसे पति व मंगेतर अपनी अपनी आस्थानुसार मनाते हैं।

करवा चौथ कैसे करें पारंपरिक व्रत? How to do Karva Chauth traditional fast?

प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करके पति, पुत्र, पौत्र, पत्नी तथा सुख सौभाग्य की कामना की इच्छा का संकल्प लेकर निर्जल व्रत रखें। शिव,पार्वती, गणेश व कार्तिकेय की प्रतिमा या चित्र का पूजन करें। बाजार में मिलने वाला करवा चौथ का चित्र या कैलेंडर पूजा स्थान पर लगा लें। चंद्रोदय पर अर्घ्य दें। पूजा के बाद तांबे या मिट्टी के करवे में चावल, उड़द की दाल भरें । सुहाग की सामग्री,- कंघी, सिंदूर ,चूड़ियां, रिबन, रुपयेआदि रखकर दान करें। सास के चरण छूकर आर्शीवाद लें और फल, फूल, मेवा, बायन, मिश्ठान,बायना, सुहाग सामग्री,14 पूरियां ,खीर आदि उन्हें भेंट करें। विवाह के प्रथम वर्श तो यह परंपरा सास के लिए अवश्य निभाई जाती है। इससे सास- बहू के रिश्ते और मजबूत होते हैं।

करवा चौथ 17 अक्‍टूबर 2019 शुभ मुहूर्त (Karva Chauth 17 October 2019 auspicious time)

चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 17 अक्‍टूबर 2019 (गुरुवार) को सुबह 06 बजकर 48 मिनट से
चतुर्थी तिथ‍ि समाप्‍त: 18 अक्‍टूबर 2019 को सुबह 07 बजकर 29 मिनट तक

करवा चौथ व्रत का समय 17 अक्‍टूबर 2019 (Time for Karva Chauth fast 17 October 2019)

सुबह 06 बजकर 27 मिनट से रात 08 बजकर 16 मिनट तक।

करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त (Auspicious time of karva chauth puja)

17 अक्‍टूबर 2019 की शाम 05 बजकर 46 मिनट से शाम 07 बजकर 02 मिनट तक।
चंद्रोदय का समय: पंचांग के अनुसार रात्रि 8 बजकर 27 मिनट पर होगा। लेकिन वास्तव में कई शहरों में चंद्रोदय 9 बजे केे मध्य होगा।

करवा चौथ की पूजा विधि, KARVA CHAUTH KI SABSE SARAL PUJA VIDHI

करवा चौथ की पूजन सामग्री Worshiping materials of Karva Chauth

करवा चौथ के व्रत से एक-दो दिन पहले ही सारी पूजन सामग्री को इकट्ठा करके घर के मंदिर में रख दें। पूजन सामग्री इस प्रकार है-

  • मिट्टी का टोंटीदार करवा व ढक्‍कन।
  • पानी का लोटा।
  • गंगाजल।
  • दीपक, रूई।
  • अगरबत्ती।
  • चंदन, कुमकुम, रोली, अक्षत।
  • फूल, कच्‍चा दूध, दही, देसी घी।
  • शहद, चीनी, हल्‍दी, चावल, मिठाई, चीनी का बूरा।
  • मेहंदी, महावर, सिंदूर, कंघा, बिंदी, चुनरी, चूड़ी, बिछुआ।
  • गौरी बनाने के लिए पीली मिट्टी।
  • लकड़ी का आसन,छलनी।
  • आठ पूरियों की अठावरी।
  • हलुआ और दक्षिणा देने के पैसे।

करवा चौथ की सबसे सरल व फलदायी पूजा विधि (The simplest and fruitful worship method of Karva Chauth)

  • करवा चौथ वाले दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्‍नान कर लें।
  • अब इस मंत्र का उच्‍चारण करते हुए व्रत का संकल्‍प लें-
    ”मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये”
  • सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करें और फिर दिन भर निर्जला व्रत रखें।
  • दीवार पर गेरू से फलक बनाएं और भीगे हुए चावलों को पीसकर घोल तैयार कर लें। इस घोल से फलक पर करवा का चित्र बनाएं। वैसे बाजार में आजकर रेडीमेड फोटो भी मिल जाती हैं। इन्‍हें वर कहा जाता है. चित्रित करने की कला को करवा धरना का जाता है।
  • आठ पूरियों की अठावरी बनाएं। मीठे में हल्‍वा या खीर बनाएं और पकवान भी तैयार करें।
  • अब पीली मिट्टी और गोबर की मदद से माता पार्वती की प्रतिमा बनाएं. अब इस प्रतिमा को लकड़ी के आसान पर बिठाकर मेहंदी, महावर, सिंदूर, कंघा, बिंदी, चुनरी, चूड़ी और बिछुआ अर्पित करें.
  • जल से भर हुआ लोट रखें।
  • करवा में गेहूं और ढक्‍कन में शक्‍कर का बूरा भर दें।
  • रोली से करवा पर स्‍वास्तिक बनाएं।
  • अब गौरी-गणेश और चित्रित करवा की पूजा करें।
  • पति की लंबी उम्र की प्रार्थना करते हुए इस मंत्र का उच्‍चारण करें-
    ”ऊॅ नम: शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभाम।
    प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे॥”
  • करवा पर 13 बिंदी रखें और गेहूं या चावल के 13 दाने हाथ में लेकर करवा चौथ की कथा कहें या सुनें।
  • कथा सुनने के बाद करवा पर हाथ घुमाकर अपने सभी बड़ों का आशीर्वाद लें और करवा उन्हें दे दें।
  • पानी का लोटा और 13 दाने गेहूं के अलग रख लें।
  • चंद्रमा के निकलने के बाद छलनी की ओट से पति को देखें और चन्द्रमा को अर्घ्‍य दें।
  • चंद्रमा को अर्ध्य देते वक्‍त पति की लंबी उम्र और जिंदगी भर आपका साथ बना रहे इसकी कामना करें।
  • अब पति को प्रणाम कर उनसे आशीर्वाद लें और उनके हाथ से जल पीएं। अब पति के साथ बैठकर भोजन करें।

करवा चौथ की कहानी Karva Chauth Katha

इस रोज बगैर खाए या पिए महिलाएं अपने पति या होने वाले पति की लंबी उम्र की कामना में व्रत रहती हैं  करवा चौथ को लेकर कई कहानियांहैं-एक कहानी महारानी वीरवती को लेकर है-सात भाइयों की अकेली बहन थी वीरवती- घर में उसे भाइयों से बहुत प्यार मिलता था-उसने पहलीबार करवा चौथ का व्रत अपने मायके यानी पिता के घर रखा- सुबह से बहन को भूखा देख भाई दुखी हो गएण् उन्होंने पीपल के पेड़ में एक अक्सबनायाए जिससे लगता था कि चंद्रमा उदय हो रहा है- वीरवती ने उसे चंद्रमा समझाण् उसने व्रत तोड़ दिया ण्जसे ही खाने का पहला कौर मुंह मेंरखाए उसे नौकर से संदेश मिला कि पति की मौत हो गई है  ण्वीरवती रात भर रोती रही – उसके सामने देवी प्रकट हुईं और दुख की वजह पूछी-देवी ने उससे फिर व्रत रखने को कहा  ण्वरवती ने व्रत रखा  उसकी तपस्या से खुश होकर यमराज ने उसके पति को जीवित कर दिया।